
नमामि आदि शंकरम्
नमाम्यहं महेश्वरम्
डमा डमा नमाम्यहम
श्री अमरनाथ ईश्वरम्
हिमानि शिव नमाम्यहम
बर्फ़ानी शिव शंकरम्
हैं आप क्यूँ अजर अमर
जब गूंजे ये उमा के स्वर
निकल पड़े उमा के नाथ
बताने वो गुफ़ा अमर
रहस्य गूढ़ था अमर
न जाने चर सुने न चर
सब छोड़ते पड़ाव में
नंदी को पहल गांव में
माथे पर चंदा चम चमे
चंदन सुवासित डम डमे
सूनी जटा अब हो गयी
चंदनबाड़ी कहे ताव में
सब मोह माया विरागते
गं गं गणेश त्यागते
जब सुत शिवा से है विरत
समझो महागुन हैं निकट
गुफ़ा से पहले पड़ाव में
सारे तत्व बहते बहाव में
पंचतरणी संगम है सुघर
सरितायें कहती कथा अमर
हुंकारी भर सुन ली कथा
दो कबूतरों की ये व्यथा
तीर्थों में तीर्थ सब पाप हर
श्री अमरनाथ जी हैं अमर
हिमानि शिव नमाम्यहं
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