
संकट में शेरावाली की,
सकलाई देखि है,
मेरे संग संग चलती,
मैया की परछाई देखि है,
तर्ज – दिल दीवाने का डोला।
कोई राह नज़र ना आए,
जब छाए गम के बादल,
सर पे महसूस किया है,
मैंने मैया का आँचल,
माँ की चुनड़ी मेरे सर पे,
लहराई देखि है,
ये है तक़दीर हमारी,
जो तेरी शरण मिली है,
क़िस्मत से हम भक्तो की,
मैया तू कुलदेवी है,
मेरे सुख में दुःख में हरदम,
माँ आई देखि है,
तूने तो दिया है मैया,
मुझको औकात से बढ़कर,
‘सौरभ मधुकर’ की तूने,
रख दी तक़दीर बदलकर,
हमने माँ के दरबार की,
सच्चाई देखि है,
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