
संवारे की महफ़िल को संवारा सजाता है
संवारे की महफ़िल को संवारा सजाता है,
किस्मत वालो के घर में श्याम आता है,
गेहरा हो नाता बाबा का जिनसे,
मिलने को बाबा आता है उनसे,
उनका यह साथी बन जाता है,
किरपा बरसती है जिनपे इनकी,
तकदीर लिखता हाथो से उनकी,
गम का अँधेरा छत जाता है
भजन सुनते जो इनके प्यारे,
उसके परिवार के वारे न्यारे,
मंदिर सो घर बन जाता है,
कुछ भी असम्बब होता नही है,
महफ़िल में इसकी होता यही है,
सुनील सब यहाँ मिल जाते है,
अमित बंसल हनुमानगढ़
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