
सगळी दुनिया छोड़ बापजी,
दोहा – रुणेचा रा रामदेव,
थांसु भगत करे पुकार,
कलयुग छायो करूर बापजी,
करिजयो बेड़ो पार।।
आया थारे द्वार,
करदयो करदयो बापजी,
भगतां रो बेड़ो पार।।
सगळी दुनिया सयुं है न्यारो,
बाबे रो दरबार,
ऊंच नीच रो भेद मिटावै,
साचो है दातार,
दीन दुखी रा कष्ट मिटावै,
अजमल घर अवतार,
माँ मैना रा लाल बापजी,
नेतल रा भरतार,
कलयुग माही परचा भारी,
साँची है सकलाई,
द्वारका रा नाथ विराजे,
धाम रुणेचा माही,
पाप मिटायो इन धरती रो,
कीन्हो थे उपकार,
‘तुलसी’ री या अर्ज बाप जी,
करज्यो थे स्वीकार,
लेखक – रोशनस्वामी तुलसी
गायिका – महक मीर
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