
तर्ज – जगत के रंग में क्या देखु।
सजा दो घर को गुलशन सा,
मेरे सरकार आये है,
लगे कुटिया भी दुल्हन सी,
पखारो इनके चरणो को,
बहा कर प्रेम की गंगा,
बिछा दो अपनी पलको को,
उमड़ आई मेरी आँखे,
देख कर अपने बाबा को,
हुई रोशन मेरी गलियां,
तुम आकर फिर नहीं जाना,
मेरी इस सुनी दुनिया से,
कहूँ हर दम यही सब से,
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