
सजा दो शहर की हर गलियां,
मेरे घनश्याम आए है,
फैला दो हर तरफ खुशबु,
मेरे साहूकार आए है,
तर्ज – सजा दो घर को गुलशन।
जमाने भर में चर्चे है,
हाँ इनकी रहनूमाई के,
जलाओ दीप ज्योति के.
मेरे श्री श्याम आए है,
चमक चेहरे पे इतनी है,
की चमके चाँद सा मुखड़ा,
नज़र इनको ना लग जाए,
मेरे दिलदार आए है,
मेरे दिल की कहूं मैं क्या,
खुशी का ना ठिकाना है,
करूँ दीदार दिलबर के,
‘चहल’ दीदार पाए है,
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