
सतगुरु आया रे सखी म्हारा धिन गुरु आया रे
सतगुरु आया रे सखी,
म्हारा धिन गुरु आया रे,
राम राम राम म्हारा,
सतगुरु आया रे।।
ऊंचो ढलावा बैठणो रे,
गादी पिलंग बिसावा,
जनम मरण रा साँचा वे तो,
गुरु भल आया रे,
भाव रा भोजन बनाया,
तनमन सीना रे,
घनी हरक से हुई बलिहारी,
चरणा में रहना रे,
नाथ गुलाब गुरु पूरा मिलिया,
तारण आया हो,
भवानी नाथ सतगुरु चरणे,
वदावा आया रे,
प्रेषक – प्रताप जांगिड़।
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