
सतजुगा रा बेटा श्रवण,
ऐडा तो हुआ रे संतों।
दोहा – सतजुग सामी आवतो,
ओर कलजुग माँ री थाप,
अरे बेटा ऊबा सामी बोले,
देख खड़ा ये बाप।
ऐडा तो हुआ,
अरे माँ बाप री कावड लेने,
गंगा जी गीया ए हा।।
अरे आजकल रा छोरा हरामी,
अरे परणी नार ने लेने वे तो,
न्यारा रे हुआ ए हा,
अरे मारे घरो मे खीर लापसी,
थारो ने खाटी राब,
अरे असुर किदो ने नहीं रे माने,
हल्ला करी हर काम संतों ए हा,
अरे सतजुगा रा साधु संतों,
अरे हरी भजन रे कारने,
अनधन त्याग रे दिया ए हा,
अरे आजकल रा झूठा,
साधु ऐडातो हुआ रे संतों,
अरे तिलक लगावे भगवा पहरने,
पिये दारू रा गुका ए हा,
अरे सतजुगा रा चेला श्रवण,
ऐडातो हुआ रे श्रवण,
अरे गुरू री आज्ञा रे कारण,
माथा काट दिया ए हा,
अरे आजकल रा चेला श्रवण,
अरे गुरु रा चप्पल लेने वेतो,
अरे माँ बाप ने भूंडा बोलो,
हावरीयो ने सीधा रे संतों,
हावरीयो ने सीधा ए हा,
अरे केवे सतगुरु सुनो रे मानको,
नरकपुरी जाय सीधा रे संतों,
नरकपुरी जाय सीधा ए हा,
स्वर – सरिता जी खारवाल।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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