
सत री संगत गंगा गोमती,
सुरसत काशी प्रयागा हो,
लाखो पापीड़ा इणमे उबरे,
डर जमड़ो भागा हो,
सत रीं संगत गंगा गोंमती रे हा।।
ए भई ध्रुवजी और प्रहलाद ने,
सतसंग नारद जी से किनी ओ,
विष्णुपुरी वेकुण्ठ में,
सुरपति आदर दिनी ओ,
अरे भई रतना करमा सबरी भीलणी,
चेना धन्ना पीपा नेमा ओ,
सतरी संगत परताप सु,
पाया उत्तम धामा ओ,
ए भाई शेष खाना रो रे बादशाह,
राज क्या चितलाई ओ,
सतसंग रे परताप सु,
भूपा भेट चढाई ओ,
ए भाई जिण रे भूमि सु रघुवर निसरया,
रज चरणो रे लागी ओ,
चरण पखारत अहिल्या उबरी,
दिल री दुरमत भागी ओ,
ए भाई धूड़ धरे गज सीश पर,
ईश्वर मन भाई ओ,
जिण रे रज सू अहिल्या उबरी,
वो रज खोजे गजराजा ओ,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – पुखराज पटेल बांटा
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.
