
समय का पहिया चलता है चेतावनी
समय का पहिया चलता है,
उस पहिये के साथ किसी का ।
भाग्य बदलता है,
लख घौड़ा लख पालकी,
ज्यारे सर पर छत्र धरे ।
सत्यवादी राजा हरिचंद देखो,
पर घर नीर भरे।।
उन राजा के लाल को देखो ,
बिना कफ़न के जलता है ।
भरी सभा में द्रौपद सुता को,
लाया अभिमानी ।
भीष्म कर्ण और द्रोण जा बैठे,
पर एक नहीं मानी ।।
पाँचो पति द्रौपदी के देखो,
बैठे बैठे जलता है ।
हाथ जोड़ ने अरज करी वो ,
मण्डोरी राणी ।
बार बार समझाया रावण को,
एक नहीं मानी ।।
धर साधू का वेष रावण,
माँ सिया को छलता है ।
बलख़ बुखारा बादशाह ,
सुल्तान बड़ा नामी।
सुन दासी की बात मन में ,
हो गई हैरानी।।
रथ पालकी त्याग सभी तज ,
राज निकलता है ।
समय का पहिया एक दिन देखो,
राजा दशरथ के आया ।
सरयू नदी की तीर खड़ा वो,
बाण चलाया।।
लगा तीर श्रवण के देखो ,
झट प्राण निकलता है ।
तुलसी नर का क्या बड़ा ,
समय बड़ा बलवान ।
काबे लूटी गोपियाँ ,
वही अर्जुन वही बाण।।
समय से चलता शशि को देखो,
भान निकलता है,
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