
सांगलिया की बहार है,
सारी दुनिया लार है।
दोहा – सतगुरु दीन दयाल हो,
सब देवो का देव,
दास जान दया करो,
दीज्यो केवल भेव।
सेव नित करा तुम्हारी,
खीव कहे कर जोड़,
लाज गुरु रखना मेरी।
आजा रे मतवाला जोगी,
तेरा इंतज़ार है।।
सारी दुनिया हिल मिल स्वामी,
तेरा ध्यान लगाए है,
दरसन री बलहारी दाता,
बनी बनाई तैयार है,
सांगलिया सकलाई साची,
अजब रंगीली धार है,
भाई अजब रंगीली धार है,
मेला भरीजे भरपूर यहां पर,
संतो का दरबार है,
भाई संतो दरबार है,
दादर मोर पपिया बोले,
कोयल बड़ी सुप्यार है,
भाई कोयल बड़ी सु प्यार है,
आवत जावत नर नारी भाई,
बोले जय जय कार है,
भाई बोले जय जय कार है,
लादुदास मिल्या गुरु सायब,
डूबत लिया उबार है,
भाई डूबत लिया उबार है,
ख़ीव करे चरणों की सेवा,
करजो नैया पार है,
भाई करजो नैया पार है,
गायक – रामेश्वर जी सुजानगढ़।
प्रेषक – कार्तिक जनागल।
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