
मन के झूले में बिठाकर,
बांधी भाव की डोर,
सांवरे तुझे झुलाएं,
प्रेम से डोर हिलाएं।।
तर्ज – स्वर्ग से सुंदर सपनो से।
हमने बनाया अपने,
ह्रदय को आसन,
आन बिराजो बाबा,
इतना निवेदन,
मन बगिया को आज खिला दो,
आ जाओ चितचोर,
झूला झूलाना तो है,
बस एक बहाना,
मकसद हमारा मन के,
भाव दिखाना,
भाव बिना काहे का झूला,
कैसी रेशम डोर,
जिसने बनाया अपने,
मन को हिंडोला,
उसमें ही झूले मेरा,
सांवरा सलोना,
‘हर्ष’ कहे फिर छमछम नाचे,
उसके मन का मोर,
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.


