
कलयुग के अवतार,
मेरे श्याम लखदातार,
तुम बन के पालनहार,
सांवरे रखना मेरा ध्यान,
तुम रखना मेरा ध्यान,
मिलता रहे हर बार,
मुझे तुमसे पिता का प्यार,
देकर भाई सा दुलार,
तर्ज – ना कजरे की धार।
बाबा मेरे जीवन में,
छाया है कैसा मौसम,
जहाँ चारों और निराशा,
और पल खुशियों के है कम,
मैं हारा तू सहारा,
अब तुम्हे पुकारे हम,
नैया है मझधार,
तूफ़ान में गुम पतवार,
तुम बन के खेवनहार,
सूरज चंदा के जैसे,
दो दीप मेरे आँगन के,
बेवक़्त ही तेज़ हवाएं,
उन्हें बुझा गई जीवन से,
अब अँधेरा ही अँधेरा,
बस रहा है मेरे मन में,
दुखियों के दातार,
अब श्याम तेरी दरकार,
तुम बनके मेरा परिवार,
मैंने ये सुना मिट जाती,
तेरे द्वार से हर मजबूरी,
तुम साथी बनकर करते,
मन की आशाएं पूरी,
भक्तों के रखवाले,
फिर से हम से है क्यों दूरी,
किस्मत मेरी संवार,
ना भूलूँ तेरा उपकार,
अब अर्ज़ी यही हर बार,
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