
सांवरे सलोने जैसा यार मिल गया,
जीवन को जीने का आधार मिल गया,
मोती को सीप जैसे नाव को किनारा,
ऐसा मिला है मुझको श्याम का सहारा,
भटके जैसे राही को एक सार मिल गया,
दूर ये सफर है बड़ा चलना कठिन है,
पथ पथरीले सारे संभलना कठिन है,
अँधेरी डगर पर वो हर बार मिल गया,
जीवन की नैया मजधार में पड़ी थी,
बिच भंवर को रोके मुसीबत खड़ी थी,
डूबे एक माझी को पतवार मिल गया,
‘धीर’ क्या छुपा है मन में सब जानता है,
हालात क्या है मेरे पहचानाता है,
मेरे हर बुलावे पे तैयार मिल गया,
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