
सांवलिया सरकार बेगा आओ,
थारी है दरकार बेगा आओ,
कदसु करा पुकार ना बिसराओ,
सांवरिया सरकार बेगा आओ,
तेरी किरपा से तेरे भजन मिल गए,
मेरे जीवन में लाखों सुमन खिल गए,
करूँ थारी मनुहार,
बाबा करके थोड़ा विचार,
बेगा आओ,
तेरी पजा समझकर झुकाई गर्दन,
अब बारी तुम्हारी मिटा दे उलझन,
करूँ थारी जय जयकार,
रोज कहने में मुझको तो आती है शरम,
लाज दोनों की गिरवी पड़ी है बाबा सुन,
‘नंदू’ था पर दारमदार,
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