
साधुडा बिना नहीं आवडे,
नहीं आवडे रे भई मारा नहीं आवडे,
एक दिन साधुडा निजर भर निर्खया,
निरखत निरखत नेंण ठरे रे,
सत री संगत मे घणौ रे आनन्द है,
भर भर प्याला प्रेम पियो रे,
दादर मोर पपया बोलत है,
गेरी गीगन मे घोर पड़े,
दहिडि नगर मे नव दरवाजा,
खोजत खोजत खबर पड़े,
स्वामी डूंगरपूरी चरणों री सेवा,
दहिडि पाप परा झड़े,
प्रेषक – मांगीलाल सेन बायतु।
भजन गायक – सुरेश जांगिड़।
बाड़मेर 7073648651
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