
साधु भाई निर्गुण खेल हमारा,
छंद – क्या पूछो गम अगम की,
रहत वचन के पार,
जिभ्या पर आवे नहीं,
बेरंग एक अपार।
जिन का सकल पसारा,
गुरु चश्मा लगा कर देखिये,
जहाँ तक हंस हमारा।
उमाराम निर्दोष हैं,
बाणी करे पुकार,
क्या पूछो गम अगम की,
खट दर्शन साधु सब सुण जो,
अन अक्षर किरतारा।।
कंठ बिना राग छतीसु छेड़ी,
पग बिनाखेल सुधारा,
आंधा अगम अगोचर निरख्या,
बहरा सुण दो धारा,
नीले पपीले राय पचीस का,
तीनों खोज बिचारा,
दर्शया गेब गुरु का ध्याना,
प्रगट कुतबु बिन सारा,
अखेह अजाति सब का संगी,
बेरंग ब्रह्म विचारा,
चेतन थहिया एक रस आदु,
वो निर्लिप्त निरकारा,
शोध स्वरूप आतम नित केवल,
नाम रूप से न्यारा,
उमाराम ने सुजिया न भव की,
प्रगट करू पुकारा,
गायक – संत भजनानंद जी।
प्रेषक – रामेश्वर लाल पँवार, आकाशवाणी सिंगर
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