
सायल मारी साम्भलो थे अजमल घर अवतारी
सायल मारी साम्भलो थे,
अजमल घर अवतारी ओ,
एकर दर्श दिखावो माने,
निकलंक नेजाधारी ओ,
निकलंक नेजाधारी ओ जे ए हा।।
कुंकुम पगल्या मांड्या बाबो,
दीनी दूध उतारी ओ,
कपडा रो घोडलीयो उडायो,
मिसरी कर दिनी खारी ओ,
मिसरी कर दिनी खारी ओ जे ए हा।।
भेरूडा राकस ने मार्यो,
भूमि रो भार हटायो ओ,
सुगना रा भानु ने जिवायो,
नाव तारी बोयता री ओ,
नाव तारी बोयता री ओ जे ए हा।।
पीरा ने परचो दिखलायो,
डाली बाई ने तारी ओ,
जातपात रो भेद मिटायो,
जाने दुनिया सारी ओ,
जाने दुनिया सारी ओ जे ए हा।।
भीड पडी है वेगा आईजो,
लीले री असवारी ओ,
फेपसिंह चरना रो चाकर,
करे सेवना थारी ओ,
करे सेवना थारी ओ जे ए हा।।
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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