
सिर पे सजा के मोतियों का ताज,
रखने को अपने भक्तों की लाज,
ये गौरी के ललना आये गजराज,
गौरी के ललना आये गजराज,
श्रद्धा से झोलिया अपनी पसारो,
सिद्धिविनायक को मन से पुकारो,
माँगना जो तुमने माँग लेना आज,
दया की दृष्टि ये जिनपे करेंगे,
दुखरो भी उनके तो पल में हरेंगे,
दुखरो को उनके तो पल में हरेंगे,
भक्तो की चिंता का होगा इलाज,
ये है महोदर वे गणराज दाता,
करुणा का सागर ये भाग्यविधाता,
जिसे भाये निर्दोष भक्ति का साज,
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