
सीधी निंगाह मेरे पे करदे इतणाऐ शयान भतेरा स हो बालाजी
सीधी निंगाह मेरे पे करदे,
इतणाऐ शयान भतेरा स,
होहो बालाजी।।
चरणां में सिर धरणां चाहुं,
तेरे भवन का लहणां चाहुं,
हरि कीर्तन करणां चाहुं,
काया बीच अंधेरा स,
तेरे भवन मेंं आणां चाहुं,
अपणां कर्म बणाणां चाहुं,
हरि कीर्तन गाणां चाहुं,
तुं भगवान मेरा स,
और किते ना जाणां चाहुं,
मन का भगमा बाणां चाहुं,
मन भक्ति में लाणां चाहुं,
तन्नै सब बातां का बैरा स,
तेरा दास बणनां चाहुं,
समचाणे में दर्शन चाहुं,
तेरी शरण में आणां चाहुं,
भक्त मुरारी तेरा स,
गायक – नरेंद्र कौशिक जी।
प्रेषक – राकेश कुमार खरक जाटान(रोहतक)
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