
सुन मेरे कान्हा ज़रा ये बताना
सुन मेरे कान्हा ज़रा ये बताना,
खफा हमसे तू क्यूँ हो गया ।
जमुना पे आना, बांसुरी सुनाना,
बता दे कहाँ तू खो गया ।।
ओ मानजा नही तो तुम्हे,
मैया की कसम, सुन मेरें कान्हा ।
ज़रा ये बताना, खफा हमसे तू क्यूँ हो गया ।।
हद तोड़ दी थी तुमने ही सारी ।
बता करती क्या सखिया बेचारी ।।
चुपके से मार कंकर गगरीया फोड़ना,
पीछे से खींच दामन कलइया मोड़ना ।
हमको सताना सताके रुलाना,
बता दे हमारी क्या खता ।।
करते भी क्या तुझको बहुत समझाया ।
मां यशोदा को जाके बताया ।।
तेरे लाल ने मैया बहुत सताया,
दिल गोपियों का उसने दुखाया ।
आभी जा संग में तू क्यू ज़िद पे अड़ा,
छोटी सी बात को क्यों बनाता है बड़ा ।।
बंशी सुनाजा हमको नचाजा ।
इतना क्यों भारी हो गया ।।
ऐसा ना हो कि बावरी ये अँखियाँ ।
रोये तड़पे बहाने लगे पानी ।।
करदे तू माफ हमको रे कन्हैया,
आना जमुना पे हमने हार मानी ।
कर्मो का है ये फल जो आप हमको मिले,
तेरी शरारतों से फूल दिल मे खिले ।।
हमको सताना हमको हंसाना,
सौदा सच्चा हमने कर लिया ।
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