
सेवादार बना ले दरबार का
ओ तेरे मंदिराँ, ते रहवाँ, झाड़ू मारदा ॥
तेरी, चुन्नी नूं लगे, सितारे नी माँ ॥
जिवें, अंबराँ ते चन्न, सितारे नी माँ ॥
जलवा, देखिया मैं, तेरे दरबार का ॥
राजा अकबर, द्वारे तेरे, आया ओ माँ ॥
तेरियाँ, जोताँ ते, पानी ओ पाया माँ ॥
ओहदा तोड़िया, अहंकार, ताँहां मारदा ॥
तेरा ध्यानू ने, ध्यान, लगाया नी माँ ॥
सीस काट के, ओहने भेंट, चढ़ाया नी माँ ॥
ओह सेवादार, होया, तेरे दरबार का ॥
अपलोडर – अनिलराममूर्ति भोपाल
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