
सैया आज पूनम की है रात,
गई रे सतसंगत में,
सईयाँ आज पूनम की है रात,
मारा सिमरत पकडी बाय,
भिगोई घेरा रंग में,
सुरता आज पूनम की है रात,
सुरता दिसे रूप स्वरूप,
कवारी क्यु रही,
मारा सिमरत मिलीया नाही,
कवारी यु रही,
सुरता प्रेम री प्रीत लगाय,
ज्ञान लत लेलीया,
सुरता चरनो रो खंभ रोपाय,
तोरन हद बोंधीया,
सुरता अलद उलद रे बीच,
रतन चवरी मांडी,
सुरता हरि सु हथलेवो जोड,
सुरत फिर आपरी,
सुरता दिना पदार्थ चार,
रतन दश दायजो,
सुरता गेना ज्ञान स्वरूप,
हार निज नाम रो,
सुरता भेजीया पियाजी रे देश,
लपछेडो नही राखीयो,
सुरता पिवरिया मे नही रे सुहाय,
पिया रे घर जावनो,
सुरता छोड्यो मोमाल ने मासेर,
बुआ दश बेनडली,
सुरता छोड्यो सहेलीयो रो साथ,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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