
हनुमत कहाँ तुमने देरी लगायी
( तेरे आने में कैसे विलम्ब हो गया,
अंजनी लाला ये कैसा सितम हो गया,
माँ सुमित्रा को कैसे करूँगा खबर,
गहरी निद्रा में तेरा लखन सो गया। )
हनुमत हनुमत हनुमत हनुमत,
हनुमत कहाँ तुमने देरी लगायी,
जुदा हो रहा है यहाँ मेरा भाई,
तेरे बिन नहीं अब ना कोई सहायी,
विधाता ये दिन तूने कैसा दिखाया,
सिया खोयी मैंने लखन भी गवाया,
लखन के बिना राम कैसे जियेगा,
बिछुड़ने का गम भाई कैसे पियेगा,
है मुमकिन पवनसुत को बूटी ना पायी,
भरत शत्रुघन से ना नज़रें मिलेंगी,
नगरवासियों की ना बातें झिलेंगी,
सजन मेरे कीमूल को झलकी दिखा दो,
कहे उर्मिला मेरे पी से मिला दो,
रो रो के मरे मेरी कौशल्या माई,
शत्रु ने कैसा वार किया है,
दुश्मन ने कैसा वार किया है,
ज़ालिम ने कैसा वार किया है,
पापी ने कैसा वार किया है,
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