
हनुमन्त महा बलवन्त प्रभो
हरि लीजै प्रभु विपद् हमारी
आरतजन को त्रास निवारिये
देहु अभय कपि विनय हमारी
हे पवनपुत्र वरदायक हो
प्रभु-शपथ अमरपददायक हो
गति सर्वत्र तुम्हारि प्रभु
तुम ज्ञान बुद्धि बलदायक हो
प्रभु अंजनिसुत बलधारक हो
सुग्रीव महादुख हारक हो
तुम अक्षय के क्षयकारक हो
सीता के त्रास निवारक हो
संग्राम महाभयकारक हो
असुरों के प्राण विदारक हो
लक्ष्मण के जीवनदायक हो
रघुपति के शोक-निवारक हो
रति चरणकमल रघुनायक हो
पद भक्ति-मुक्ति सुखदायिनि दो
जो जगत मोह अति भ्रमित हुए
प्रभु राम-भक्ति अनपायिनि दो
गौरीश नन्दन पाण्डेय
८७३८०६०८४३
सोनभद्र
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