
हनुमान के चरचे है
इस धरती से उस अम्बर तक श्री राम के चरचे है,
दुनिया के हर घर में देखो हनुमान के चरचे है,
इस धरती से उस अम्बर तक,
इस दुनिया का कोई काम न टलता श्री राम धुंधरी बिना,
धनुधारी का काम न चलता बजरंगी बल धरी बिना,
किया सभी का उस कल्याण के चरचे है,
मेहंदीपुर में बालाजी के दर पे लोग सब जाते है,
अपने अपने संकट के हिट अर्जी वह लगाते है,
प्रेत राज सरकार के उस अस्थान के चरचे है,
सीता जी की खोज के हिट सागर की छलांग लगाई है,
घुस कर रावण की लंका भी तुमने क्या खूब जलाई है,
मचा दिया लंका में उस तूफ़ान के चरचे है,
प्रभु राम संग सीता लक्ष्मण ने परसथान किया,
अपने गले से लगा के तुमको बहुत बड़ा सामान दिया,
रहो अमर इस धरती पर वरदान के चरचे है,
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