
हमें तो वृंदावन जाना है
हमें तो वृंदावन जाना है
हमें तो, बरसाने, जाना है ।
वृंदावन की, कुंज गलियन में ।
बरसाने की, कुंज गलियन में ।
राधे राधे, गाना है,
गोवर्धन, परि,क्रमा पाऊँ ।
अपना, जीवन, सफ़ल बनाऊँ ॥
गिरवर, के हमें, दर्शन करके ॥
पार, उतरना है,
ब्रज की, रज़ से, तिलक लगाऊँ ।
मानसी, गंगा के, दर्शन पाऊँ ॥
यमुना, जी में, इशनान करके ॥
भव जल, तरना है,
मधु, वन की देखो, छटा निराली ।
इसकी, महिमा, जग ने जानी ॥
मधु, वन की इन, लता पता में ॥
लिपट के, रहना है,
बाँके, बिहारी की, छवि निहारूं ।
मन ही, मन में, दर्शन पाऊँ ॥
चौख़ट, पे तेरी, जाकर कान्हा ॥
घर वापस, न जाना है,
कान्हा से, नयन, मिलाकर देखो ।
उसकी, शरण में, आकर देखो ॥
सबसे, सुँदर, बाँके बिहारी ॥
दर्शन, पाना है,
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