
करूं वंदना मै झुकाकर ये सर।
छूटे ना कभी तुम्हारा ये दर॥
मुझे ना बिसारो करलो कुबूल।
बनाकर के रखना इन चरणों की धूल॥
तर्ज=हम ऐसे करेंगे प्यार की दुनिया याद करे..
हम आए तुम्हारे द्वार ,गजानंद दया करो।
भक्तों की सुनके पुकार,गजानंद दया करो॥
हम आए तुम्हारे द्वार...
सबसे पहले जो भी तुमको याद करता है।
शीश झुकाकर चरणों में फरियाद करता है॥
उसकी सभी बिगड़ी तुमने बनाई है ।
जिसने तेरी दिल में ज्योत जलाई है।
ना उसकी कभी हो हार,गजानंद दया करो।
आओ महफिल में एकबार,गजानंद दया करो।
भक्तों की सुनके पुकार..
सब वेदों ने देवा तेरी महिमा गाई है।
माँ गौरी यह देख देख मन में हर्षाई है॥
चन्दन चौकी है हम आसन लगाते है।
गंगा जल से देवा स्नान कराते है॥
सुन दास सजन की पुकार,गजानंद दया करो।
मेरे मन के मिटा दो विकार,गजानंद दया करो।
हम आए तुम्हारे द्वार गजानंद गजानंद दया करो।
भक्तों की सुन के पुकार, गजानंद दया करो॥
डॉ सजन सोलंकी
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