
हम तेरे ही बालक हैं, तू डाँट ये मुझे लगाना॥
(तर्ज – देना हो तो दीजिए जनम-जनम का साथ)
कान पकड़कर मेरा मैया, सही रस्ते पे लाना।
हम तेरे ही बालक हैं, तू डाँट ये मुझे लगाना॥
भटकूँ जब भी इधर-उधर, मैं तू ही ध्यान ये रखना माँ।
थाम के तेरी उँगली को, मैं गोदी में सर रख लूँ माँ।
एक तेरा भरोसा मुझको, तू छोड़ कभी ना जाना॥
माँ का आँचल मिला है मुझको, पिता के जैसे साथ दिया।
जब-जब आफत आई है, माँ ने उसको थाम लिया।
एक आँसू के बदले में, तू सागर ये बन जाना॥
साथी बनकर साथ दिया है, हरदम साथ ये चलती है।
बिन कुछ कहे ये मैया मेरी, इतनी कृपा ये करती है।
लकी पे दया तुम्हारी, तुम उसको गले लगाना॥
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