
ओम सत्य ओम सत्य,
होवे हर की आरती,
हरि ओम हरि ओम,
जय जय बोले,
बाबा सारी आलम,
निर्भय नगारा बाजे,
अकड़ बम अकड़ बम हरदम।।
चार खूट और चोदह भवन में,
आप री फिरे हो बाबा साची या कलम,
सुख भर सुतो बाबो पाव हिलावे,
आप री गति हो बाबा आपने मालूम,
तू मारो पटवो तु ही पटवारी,
आपकी सेवा में बाबा रे हूं हरदम,
चार चरण जद गोरख बोले,
बेग रे भगता री बाबा राख जो कलम,
हरि ॐ हरि ॐ,
स्वर – गोपाल जी बजाज।
प्रेषक – मदन मेवाड़ी।
ये भी देखें – ॐ जय अजमल लाला।
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