
हरि तेरो अजब निरालो काम चेतावनी
ओ हरि तेरो अजब निरालो काम ।
अजब निरालो काम ।।
शावरीया तेरो अजब निरालो काम,
सुख में सिमरन कोई नहीं करता ।
दुःख में रेट तमाम ,
हरि तेरो अजब निरालो काम ।।
माया धन की बांध पोटली,
करता गरभ गुमान ।
आ माया अंत काम ना आवे,
नही जाणे अज्ञान ।।
मालीक मेरा सब कुछ तेरा,
क्यो भुला इन्सान ।
तेरा तुमसे पाकर के नर,
बण बेठा धनवान ।।
नर तन चोला पाकर भुला,
रटयो नही भगवान् ।
क्या करता क्या करदे मालीक,
एक दिन माटी मे मील जावे,
हाड मास और चाम ।
जुटी काया जुटी माया,
साचो है तेरो नाम ।।
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