
हरि भजन बिना मुक्ति ना होवे
सत कर बोलो सत कर बोलो सत्य की पैड़ी चढ़ जइयो,
हरि भजन बिना मुक्ति ना होवे व्रत करो एकादशी का.......
ग्यारस के दिन चौका देवें आले दिवाले वह झाड़े,
या करनी से बनी मकड़ी, जाल पूर्ति वह फिरती,
ग्यारस के दिन कपड़ा धोवे जल में मैल रमा देती,
या करनी से बनी है मछली पेट पकड़कर वह रहती,
आए गए का आदर ना करती भूखे को भोजन ना देती,
या करनी से बनी है कूतिया घर-घर झांकत वह फिरती,
सूरज सोनी कुल्ला करता तके पराई जोनारी,
या करनी से बना कोड़िया दर दर मारा वह फिरता,
आए गए का आदर करती भूखे को भोजन जो देती,
या करनी से बनी राधिका श्री कृष्ण के संग रहती,
मां बहन का आदर करता तके ना पराई जो नारी,
या करनी से बना कृष्ण जी राधा के संग वो रहता,
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