
हर पल श्याम का शुक्र मनाऊँ,
ये मेरा रखवाला है,
मेेरे जीवन का रखवाला,
केवल खाटू वाला है,
मुझे अब कोई भी फिकर नहीं,
किसी बात का मुझको डर नहीं,
मेरा श्याम रहता है मेरे साथ में,
तर्ज – जब तुम आ जाते हो।
रोज सवेरे श्याम की उंगली,
थाम के घर से निकलती हूँ,
सच कहती हूँ हर रस्ते पर,
श्याम के संग ही चलती हूँ,
मैंने पकड़ लिया इसका आंचल,
मेरा साथ निभाता है हर पल,
दुनिया की कोई मुश्किल,
अब सामने मेरे आती नही,
कैसी भी उलझन हो मुझसे,
बिलकुल भी टकराती नही,
मेरे सिर पर श्याम का हाथ है,
सबको ही पता ये बात है,
जीवन की सारी चिंताओं,
से मै कोसो दूर हुई,
श्याम के चरणों में रहकर,
अब तो मैं कोहिनूर हुई,
ये श्याम का सारा करिश्मा है,
‘शर्मा’ का श्याम से रिश्ता है,
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