
हलवे की थाली भर भर लायी,
माँ हलवे की थाली भर भर लायी,
मैं पहले तुझे भोग लगाऊं,
फिर मैं संगत में बटवाऊं,
पूरी मन की मुराद कर माँ महा माई,
लायी हलवे की थाली भर भर लायी,
ए माँ भर के देशी घी का हलवा,
मैंने आप बनाया,
हलवा मैंने आप बनाया,
किसमिस काजू मेवा डाल के चांदी के परत से सजाया,
चांदी के परत से सजाया,
माँ मेरी भोग लगाओ,
भोग अमृत ये बनाओ,
हलवे की थाली मैं भर भर लायी।
माँ मीठा मीठा हलवा खा कर मीठा मीठा मीठा वर दो,
मीठा मीठा वर दो ,
अपने भक्तों की झोली माँ सुख संपत से भर दो,
सुख संपत से भर दो,
माँ बड़ी दयालु हो तुम,
शरण में खड़े हुए हम,
ओ पूरी मन की मुराद कर माँ महा माई,
हे जगजननी तुम तो सदा उपकार किया करती हो,
उपकार किया करती हो,
सरल सभी सपनो को साकार किया करती हो,
साकार किया करती हो,
ये लखा दास तुम्हारा,
करू बस एक इशारा,
की पूरी मन की मुराद हो जाये माँ महा माई,
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