
हे अंजनी पुत्र हे मारुती इतनी बिनती सवीकार करो
हे अंजनी पुत्र हे मारुती इतनी बिनती सवीकार करो ।
इस मन मंदिर में बस जाओ मुझ निर्बल का उद्दार करो ॥
मैंने तो सुना है हे हनुमंत तुम दुखियों के दुःख हर्ता हो,
आ जाए कोई जो तुम्हारी शरण बन जाते तुम सुख करता हो ।
दुःख के इस जीवन सागर से मेरी नैया भी पार करो,
तुम एक उद्धारण हो जग में श्री राम की सच्ची भक्ति का,
आशीष मुझे भी दे दो प्रभु सच्ची सेवा की शक्ति का ।
मैं आपका सेवक बन पाऊं मेरा सपना साकार करो,
भक्तों की बिगड़ी बनाने को तुम पवन वेग से चलते हो,
वेदों में लिखा वह पड़ा मैंने तुम रूप अनेक बदलते हो ।
मेरे रोम-रोम जो बस जाये वो रूप स्वीकार करो,
आजाओ कभी मेरे घर भी पावन दर्शन मैं कर लूँगा,
धो धो के चरण गंगा जल से प्रभु चरणामृत मैं पी लूँगा ।
मेरा सोचा सच हो जाए प्रभु ऐसा मुझ पर उपकार करो,
हे पवन पुत्र केसर नंदन तुम ही जग के रखवारे हो,
तुम अज़र-अमर-बलशाली हो सिया राम लखन के प्यारे हो ।
श्री राम से आशीष ले-लेकर मुझ पर उसकी वयोछार करो,
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