
हे करुणा मयी राधे मुझे बस तेरा सहारा है
हे करुणा मयी राधे,
मुझे बस तेरा सहारा है,
अपना लो मुझे श्यामा,
तेरे बिन कौन हमारा है,
कोई किसी का नहीं जहाँ में,
झूठी जग की आस,
हम बेबस लाचारों की श्यामा,
तुम से यही अभिलाष,
दिनों पे कृपा करना,
यही स्वाभाव तुम्हारा है,
गहरी नदिया नांव पुरानी,
डगमग डोले नैया,
बिच भवर में आन फसा हूँ,
पकड़ो मेरी बहियाँ,
कहीं डूब ना जाऊँ मैं,
किशोरी दूर किनारा है,
तेरे दर पे जो भी आए,
उनको तुम अपनाती,
गर्दिश के मारो की श्यामा,
बिगड़ी बात बनाती,
हम जैसे अधमो का,
जीवन तुमने ही सवारा है,
‘चित्र विचित्र’ अपने कर्मो से,
मन ही मन घबराए,
तेरी कृपा का ले के सहारा,
द्वार तुम्हारे आए,
तेरे दर के सिवा मेरा,
कहीं नहीं और गुजारा है,
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