
है विष्णु रो अवतार,
सतगुरु जांभोजी म्हारा जांभोजी।।
जल थल अग्नि पवन नहीं था,
चांद सूरज और गगन नहीं था,
मायाजाल अपार,
पांच तत्व मिल सृष्टि रचाई,
ब्रह्मा विष्णु महेश कहाई,
सब का पालनहार,
बालपणे मे गांया चराई,
सिर पर भगवी टोपी धारी,
बन गए गूंगे श्याम,
भक्त काज युग युग अवतारी,
संत भक्त के कारज सारि,
लियो पीपासर अवतार,
समराथल सतगुरु जी आया,
शब्दा रो माने ज्ञान सुनाया,
दियो अमृतपान पिलाय,
भजन प्रेषक –
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