
होके शेरो के रथ पे सवार मैया पावागढ़ से चली
होके शेरो के रथ पे सवार,
मैया पावागढ़ से चली,
तेरी मैदां में चमके तलवार,
तर्ज – मैं तो छोड़ चली।
बजरंग है आला तो भेरू है काला,
भूतो की टोली संग कलुआ है काला,
ओ रही पल पल में किलकारी मार,
चंदा सी माथे पे बिंदिया सुहानी,
बैठी है रथ पे वो रण की दीवानी,
वो करे पल पल में दुष्टो का संहार,
ओ काली महाकाली,
माँ दुर्गा खप्पर वाली,
अपार तेरी माया,
क्या समझेंगे मवाली,
आंखों मे भरी लाली,
वो पिये मद की प्याली,
है चोंसठ जोगन संग में,
ओर ढंकिनी बैताली,
कुछ आशाओ को लेकर,
आया है एक सवाली,
वो दोनों मिलकर तड़पे,
जाऊँ न हाथ खाली,
हाथ खाली यहाँ से अगर जाऊंगा,
ताना देगा जमाना किधर जाऊंगा,
भीख दोगी तो इस दर से घर जाऊंगा,
वरना यह कह कर चोखट पे मर जाऊंगा,
ओ मेरी सुनले ओ मैया पुकार,
जिसने मुसीबत में माँ को पुकारा,
माँ ने दिया है उसी को सहारा,
दुनिया ने बेहद सताया है मैया,
फरियाद ले कर के आया हूँ मैया,
ओ मेरी नैया लगा दे तू पार,
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