
ॐ गण गणपतये नमः
श्री सिद्धिविनायक मोरया,
गणपति बप्पा मोरया,
मंगल मूर्ति मोरया....
तू ही धरती तू ही अंबर देवा,
प्यार का तुझमें समंदर भरा,
कदमों में थोड़ी सी देदे जगह,
नज़र ए क़रम हमपे करले ज़रा,
देवा हो देवा गणपति देवा,
रंगे हैं सभी रंग, तेरे रंग देवा,
हम सब पर तेरे बड़े एहसान हैं,
तुझसे ओ बप्पा ना कोई अंजान है,
भक्ति से तेरी
जो मिलता है वो शिष्ट है,
भक्तों को तेरे
ना छुटा अनिष्ट है,
किरपा है तेरी किस्मत ये मेरी,
संकट जो आए तू ही मेरी ढाल है,
तू ही विघ्नहर्ता,
तू ही देव देवा,
तू मुक्तिदाय,
तू ही मृत्युंजय,
तु विश्वराज,
तू ही विश्वमुख,
तू गौरीसुता,
तू ही ईशानपुत्र.....
संकोच मन में ना कोई सवाल है,
अंधियारे जग में तू जलती मशाल है,
हो मूषक सवारी तेरी तू विशाल है,
कहलाता बप्पा तू बुद्धि विशाल है,
सामने तू आजा दर्श दिखाजा,
सुन भी ले ओ देवा हम सब की पुकार ये,
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