
बैठी खोल भंडार झोलियां भरदी ए
तिन, लोकां दी, मालिक दाती ॥
सब दी, पालनहार,, झोलियां भरदी ए...
बैठी, खोल भंडार...
दिन होवे या, रात का वेला
द्वार तेरे पे, लग्गया मेला ॥
चौबीस, घंटे, खुला रहिंदा ॥
तेरा, ये दरबार,, झोलियां भरदी ए...
बहस ना कोई, तर्क ना कोई
राजे रंक में, फर्क ना कोई ॥
जो, आवे सो, राज़ी जावे ॥
ना कोई, भेद विचार,, झोलियां भरदी ए...
दर, तेरे पे, हाजरी भरके
दाती, तेरे, नाम पे सदके ॥
शांत, कलम की, बल्ले बल्ले ॥
सिफतां, करे संसार,, झोलियां भरदी ए...
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