
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु , गुरुर्देवो महेश्वरः।
गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म , तस्मै श्री गुरवे नमः॥ गुरु बिना ज्ञान न आवे , गुरु बिना मिटे न अंधकार।
गुरु ही जीवन पथ दिखलाए , गुरु ही सच्चा आधार।
हे राम हे राम , मन को दे विश्राम।
तेरे नाम की गंगा में , धो लें सारे काम।
चिंता छोड़ पुकार तुझे , हर पल ले तेरा नाम।
भीतर उजियारा भर जाए , जब जपें राम-राम।
ओम नमः शिवाय , शिव शांति बरसाए।
मन की मैल धुल जाए , जब शिव नाम गुनगुनाए।
श्वासों में शिव बस जाएं , ध्यान में शिव समाएं।
आत्मा को जो छू जाए , वो शिव भक्ति कहलाए।
वक्रतुण्ड महाकाय , सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव , सर्वकार्येषु सर्वदा॥ गणपति का नाम ले पहले , हर शुभ कार्य की शान।
बुद्धि , विवेक और साहस , देते हैं भगवान।
सर्वे भवन्तु सुखिनः , सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु , मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥ मन में मैत्री भाव जगाओ , द्वेष को दूर भगाओ।
यही संदेश जीवन का , हर दिल तक पहुँचाओ।
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