
दुर्गा आरती
दुर्गा चालीसा
शेर पे सवार होके
तेरे दर पे सर झुकाया
बेटा जो बुलाए माँ को आना चाहिए
माँ शेरावालिये
आ माँ आ
अटल छत्र सच्चा दरबार
चलो बुलावा आया है
मेरे नैनों की प्यास बुझा दे
बिगड़ी मेरी बना दे
सावन की रुत है
लाल लाल चुनरी
धरती गगन में होती है
कभी फुर्सत हो तो जगदम्बे
भोर भई दिन चढ़ गया मेरी अम्बे
बारिशों की छम छम में
या देवी सर्वभूतेषु
एक बार माँ आ जाओ
लाल चुनरिया
जगदाती पहाड़ों वाली माँ
आरती जगजननी तेरी गाऊं
मैया का चोला है रंगला
माता प्रकट हो
आजा माँ तेनू अखियाँ उड़ीक दिया
मेरी अखियों के सामने ही रहना
जय त्रिभुवन वन्दिनी गिरिनन्दिनि हे
मेरी माँ मेरा हाथ पकड़ती है
जय जय जय अम्बे माँ
जय दुर्गा माँ
जय देवी माँ
जय वैष्णो माँ
नैया से है रूठा किनारा
ओं मैया जी
भक्तो ने है तुमको पुकरा
अब तो माँ आ भी जा
हो हुआ आज अपना ही साया भी दुश्मन
मुकदर ने भी हमसे फेरी निगाहे
हुआ आज अपना ही साया भी दुश्मन
निगल गई उजालो को
गमो की सिआए
खड़ी मुश्किलें है माँ
फैलाये बाहें
कोई भी नजर ना आये सहारा
भक्तो ने है तुमको पुकारा
तुम्हारी अदालत में हम मुफलिसों की
अगर माँ भवानी ना सुनवाई ना होगी
हो तुम्हारी अदालत में हम मुफलिसों की
करेगा जहाँ में तेरी कौन पूजा
तुम्हारी माँ रेहमत की रुसवाई होगी
तेरे सिवा और ना कोई हमारा
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