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गजानन गणेशा हैं गौरा के लाला,
दयावन्त इकदन्त स्वामी कृपाला
है सबसे जुदा और सबसे ही न्यारी,
है शंकर के सूत तेरी मूषक सवारी
होती देवों में प्रथम तेरी पूजा,
नहीं देव कोई है तुमसे निराला
जो है बाँझ संतान उनको मिली है,
जो है सुने आँगन वहां कलियाँ खिली है
कोढ़ी तुम देते कंचन सी काया,
भूखे को देते हो तुम ही निवाला
रिद्धि और सिद्धि हो तुम देने वाले,
ये तन मन ये जीवन है तेरे हवाले
अविनाश गाए और छूटे ना सरगम,
बना दे ‘बिसरया’ तू गीतों की माला
दयावन्त एकदन्त स्वामी कृपाला
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