
है कौन बड़ा तुमसे मैया,
ओ त्रिभुवन की प्रतिपाली।
नमामि दुर्गे, नमामि काली,
नमामि देवी महेश्वरी,
नमामि साक्षात,
परब्रम्ह परमेश्वरी,
नमामि माता सुरेश्वरी।
जगदम्बे दुर्गे काली,
मेरी मैया शेरावाली,
जो ध्यान तेरा करले मन में,
वो जग से मुक्ति पाए,
(जय माँ, जय माँ, जय माँ, जगदम्बे)
तू प्रलयकाल में आकर के,
भक्तो को मात बचाए,
अपने भक्तो की करती है,
हर संकट में रखवाली,
जब हाहाकार मचा जग में,
सब सुर और नर घबराए,
(त्राहिमाम, त्राहिमाम, त्राहिमाम, दुर्गे)
तब त्राहिमाम माता दुर्गे,
कह देव शरण में आए,
सब देव शरण में आए,
झट महिषासुर वध करने को,
तुमने कृपाण संभाली,
तू ममता की भंडार हो माँ,
हो शिव शक्ति रुद्राणी,
नित सुमिरण करते नाम तेरा,
सारी दुनिया के प्राणी,
जिसने जो माँगा वर उसको,
तू पलभर में दे डाली,
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