
हरि नाम नहीं तो जीना क्या Hari Nam Nahi To Jeena Kya
हरि नाम नहीं तो जीना क्या
अमृत है हरि नाम जगत में
इसे छोड़ विषय विष पीना क्या
काल सदा अपने रस डोले
ना जाने कब सर चढ़ बोले
हर का नाम जपो निसवासर
अगले समय पर समय ही ना
हरि नाम नहीं
भूषन से सब अंग सजावे
रसना पर हरि नाम ना लावे
देह पड़ी रह जावे यही पर
फिर कुंडल और नगीना क्या
तीरथ है हरि नाम तुम्हारा
फिर क्यूँ फिरता मारा मारा
अंत समय हरि नाम ना आवे
फिर काशी और मदीना क्या
कर्मण्येवाधिकारस्ते
भज गोविन्दम्
श्री हरि स्तोत्रम्
कितना प्यारा है श्रृंगार
श्री गोवर्धन महाराज
श्री कृष्णा गोविन्द हरे मुरारी
बनवारी रे जीने का सहारा तेरा नाम रे
फूलों में सज रहे हैं
राधे राधे
मैं आरती तेरी गाऊं
एक राधा एक मीरा
श्री जगन्नाथ आरती
मैं तो आई वृन्दावन धाम
श्रीकृष्ण शरणाष्टक
तुझसा दयालु नहीं प्यारे
दुनिया से मैं हारा
मेरा आपकी कृपा से
पकड़ लो हाथ बनवारी
तेरा संकट सारा हर लेंगे
जय जय राधा रमन हरि बोल
कीर्तन की है रात
हे विष्णु विधाता
सांवरे को दिल में बसाकर तो देखो
हरे कृष्णा हरे रामा
मैया मोरी मैं नहीं माखन खायो
मन बसिया
जिस के घर में खाटू वाले की
यशोमती मैया से बोले नंदलाला
छाप तिलक सब छीनी रे
सजा दो घर को गुलशन सा
कन्हैया वे
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