
हे शिव शंकर हे अभयंकर
परम पिता परमेश्वर तुम हो
हे जग दाता भाग्य विधाता
विश्वपति जदीश्वर तुम हो
शरण तुम्हारी ली है हमने
रखना प्रभु लाज हमारी
जय जय कैलाश के वासी।।
हम प्राण हैं ईश्वर तुम हो
ये जाने सारे संसारी
तुम हो दयालु प्रति उपकारी
शीश तुम्हारे गंगा धारा
मस्तक साजे चंद्रमा प्यारा
मन पूजा में लिया हुआ है
देखा जबसे रूप तुम्हारा।।
अधर की प्यास बुझा दो देवा
हम प्यारे हैं सागर तुम हो
सागर मंथन विश सारा
तुम्हारे अपने कंठ उतारा
इस्सिये तो जग के स्वामी
नील कंठ है नाम तुम्हारा
मन में झटका तो ये देखा
मेरे मन के भीतर तुम हो
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