
मेरे जीवन के अपराध Jeevan Ke Apradh Lyrics – Rakesh Kala
अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर।।
गतं पापं गतं दु:खं गतं दारिद्रय मेव च।
आगता: सुख-संपत्ति पुण्योऽहं तव दर्शनात्।।
मेरे जीवन के अपराध शनि देव क्षमा करना
प्रभु क्षमा करो प्रभु दया करों
मूरख अज्ञानी हूँ शनिदेव दया करना
मैं जनम जनम से भटका हूँ
मोह माया में मैं अटका हूँ
मैं काम क्रोध में लटका हूँ
हे करुणा के आधार
मुझ पे करुणा करना
लाखों को पार लगाया है
प्रभु मुझको क्यों तरसाया है
ये कैसा तुम्हारी माया हैं
आया तेरे दरबार भव् पार लगा देना
कुछ पास नहीं है चढाने को
प्रभु तुमको भोग लगाने को
कुछ भी नहीं तुमको लुभाने को
मेरे खाली दोनों हाथ किरपा से भर देना
श्री शनिदेव अमृतवाणी
शनैश्वारा शनैश्वारा
जय जय शनि देव बलकारी
क्षमा करो
जय जय हे शनि राज देव
कृपा करो हे शनि देव
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