
जो माँ का सेवादार नहीं उस बंदे का भी क्या जीना
नौ मास गर्भ में पाल दिया
हर दुखड़ा तन पै सहन किया
उस जननी से जिसे प्यार नहीं उस बंदे का भी क्या जीना
क्या फिरणा है यहाँ दर दर का
एक माँ ही रूप है ईश्वर का
जो झुकता है इस द्वार नहीं उस बंदे का भी क्या जीना
माँ रूठ गई रब रूठ गया
दिल समझो प्रभु का टूट गया
माँ सेवा बिन कोई पार नहीं उस बंदे का भी क्या जीना
सच कड़वा कमल सिंह होता है
नश्तर से बड़े चुभोता है
करे जीवन जो न्योछावर नहीं उस बंदे का भी क्या जीना
मैया हमें भा गयो तेरो बजरंगी
तेरा कहना क्या बजरंग बाला
घाटे वाले बाबा ने सखी जीवन जोगी कर दी
दिल तुझको दिया बजरंगी
बालाजी मैं कागा तू हंस
दुखावे मत दिल माँ का
मां महागौरी की आरती
मां कात्यायनी की आरती
सांसों का क्या भरोसा
तू मेहंदीपुर में आ प्रेम से अर्जी लगा
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