
– कह देना उधो...
इतनी सी बात हमारी,
कठिन सौत कुब्जा के बस में,
जहा जहा बसे मुरारी ।
कह देना उस मनमोहन से,
प्राण क्यूँ नहीं ले गया तन से,
जैसे पानी बरसे घन से,
वैसे आँसू झारी रे ।
मथुरा की ये महल हवेली,
कुब्जा बन गई नई नवेली,
शहरी नार बड़ी अलबेली,
हमसे लगे जो प्यारी रे ।
ऐसा हमको क्यों पढ़ाया,
फूँक दई बिन अगनि काया,
क्यूँ ना हमको जहर पिलाया,
भेजी क्यूँ ना कटारी रे ।
हम आयेंगे यमुना होकर,
तन मन धन सब अपना खोकर,
सुबह शाम हम रो रो करके,
कर दी यमुना खारी रे ।
– नी मैं नचना मोहन दे नाल भजन लिरिक्स
– मुझे तूने दाता बहुत कुछ दिया है
– मोहन से दिल क्यों लगाया है...
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