Skip to content

Know why Shailputri Mata is called the daughter of King Himalaya. जानिए क्यों शैलपुत्री माता को कहा जाता है राजा हिमालय की पुत्री |

20
॥ श्री ॥

भगवान

मंदिर

पर्व त्यौहार

आरती

श्रेणी

भजन

कथा

मंत्र

चालीसा

कहानियाँ

स्टोरी

: नवरात्रि के 9 दिन भक्ति और साधना के लिए बहुत ही पवित्र माने जाते हैं।

पहले दिन शैलपुत्री

) की पूजा की जाती है।

शैलपुत्री हिमालय की पुत्री

)हैं।

हिमालय पर्वतों का राजा है।

वह अटल है, उसे कोई हिला नहीं सकता।

जब हम भक्ति का मार्ग चुनते हैं, तब हमारे मन में भी ईश्वर के प्रति वही अटूट आस्था होनी चाहिए, तभी हम अपने लक्ष्य तक पहुँच सकते हैं।

यही कारण है कि नवरात्रि के पहले दिन शैलपुत्री की पूजा की जाती है।

इस वर्ष 2022 में शारदीय नवरात्रि घटस्थापना मुहूर्त 26 सितंबर 2022 को सुबह 06:21 बजे से 08:06 बजे तक रहेगा. इसी के साथ घटस्थापना अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:58 बजे से 12:46 बजे तक रहेगा।

तो आइए जानते हैं मां शैलपुत्री की कहानी

मां शैलपुत्री की कथा

मां शैलपुत्री को सती के नाम से भी जाना जाता है।

उनकी कथा इस प्रकार है- एक बार प्रजापति दक्ष ने यज्ञ करने का निश्चय किया।

इसके लिए उन्होंने सभी देवताओं को निमंत्रण भेजा, लेकिन भगवान शिव को नहीं।

देवी सती अच्छी तरह जानती थीं कि उनके पास निमंत्रण आएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

वह उस यज्ञ में जाने के लिए बेचैन थी, लेकिन भगवान शिव ने मना कर दिया।

उन्होंने कहा कि उनके पास यज्ञ में जाने का कोई निमंत्रण नहीं आया है और इसलिए वहां जाना उचित नहीं है।

सती नहीं मानी और बार-बार यज्ञ में जाने का आग्रह करती रहीं।

सती की अवज्ञा के कारण शिव को उनकी बात माननी पड़ी और अनुमति दे दी।

जब सती अपने पिता प्रजापिता दक्ष के यहां पहुंचीं तो उन्होंने देखा कि कोई उनसे आदर और प्रेम से बात नहीं कर रहा है।

सब लोग उनसे बुरा बर्ताव कर रहे थे केवल उनकी माँ ने उन्हें प्यार से गले लगाया।

उसकी बाकी बहनें उसका उपहास कर रही थीं और सती के पति भगवान शिव का भी तिरस्कार कर रही थीं।

खुद दक्ष ने भी अपमान करने का कोई मौका नहीं छोड़ा।

ऐसा व्यवहार देखकर सती उदास हो गईं।

वह अपना और अपने पति का अपमान सहन नहीं कर सकी...

और फिर अगले ही पल उसने वह कदम उठाया जिसकी खुद दक्ष ने भी कल्पना नहीं की होगी।

सती ने उसी यज्ञ की अग्नि में स्वयं को मार कर अपने प्राणों की आहुति दे दी।

जैसे ही भगवान शिव को इस बात का पता चला, वे दुखी हो गए।

दु:ख और क्रोध की ज्वाला में जलकर शिव ने उस यज्ञ को नष्ट कर दिया।

इस सती का पुन: यहीं हिमालय में जन्म हुआ और वहीं जन्म होने के कारण उनका नाम शैलपुत्री पड़ा।

शैलपुत्री का नाम पार्वती भी है।

उनका विवाह भी भगवान शिव से हुआ थामां शैलपुत्री का वास वाराणसी में माना जाता है।

शैलपुत्री का एक अति प्राचीन मंदिर है जिसके बारे में मान्यता है कि यहां मां शैलपुत्री के दर्शन मात्र से ही भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

ऐसा भी कहा जाता है कि नवरात्रि के पहले दिन यानी प्रतिपदा के दिन मां शैलपुत्री के दर्शन करने वाले भक्त को अपने वैवाहिक जीवन के सभी कष्टों से मुक्ति मिल जाती है. मां शैलपुत्री का वाहन वृषभ है, इसलिए उन्हें वृषरुधा भी कहा जाता है।

उनके बाएं हाथ में कमल और दाहिने हाथ में त्रिशूल है।

अगर आपको यह भजन अच्छा लगा हो तो कृपया इसे अन्य लोगो तक साझा करें।

॥ जय हो ॥

हिंदी · Read on Bhajan Baan

Share this bhajan with your family

Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.

Sponsored
Devotional partner
Advertisement

About this bhajan

Meaning, tradition and how to sing it

Know why Shailputri Mata is called the daughter of King Himalaya. जानिए क्यों शैलपुत्री माता को कहा जाता है राजा हिमालय की पुत्री | is a bhajan dedicated to Durga Ji, sung in homes, temples, and community sabhas across India.

The bhajan opens with the line "Parv tyauhaar", a verse devotees often recite while lighting the evening lamp or gathering for kirtan.

On this page you can read the complete lyrics in Hindi (Devanagari), Hinglish (Roman transliteration), English translation. Use the language toggle above to switch scripts, adjust the font size for comfortable reading, and save the bhajan to revisit during your next sabha or solo practice.

If you enjoy this composition, explore more bhajan bhajans below. Each one is curated to help you build a devotional reading list that suits your tradition, mood, and occasion.

More bhajans you may like

See all